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बिहार में सियासी भूचाल: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर राष्ट्रगान अपमान का आरोप विपक्ष ने मांगा इस्तीफा

नीतीश कुमार के राष्ट्रगान विवाद पर गरमाई राजनीति, केंद्र मंत्री ललन सिंह ने विपक्ष को लिया आड़े हाथ

बिहार की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर पटना में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रगान के अपमान का आरोप लगाया गया है। इस मामले को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर रुख अपनाए हुए है और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहा है। हालांकि, इस विवाद पर जब केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनकी मांगों का कोई औचित्य नहीं है।

नीतीश कुमार पर क्या है आरोप?

राजधानी पटना में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शामिल हुए थे। इसी दौरान राष्ट्रगान की धुन बजने के समय उनके व्यवहार को लेकर विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दलों का कहना है कि उन्होंने राष्ट्रगान के दौरान अनुचित आचरण किया, जिससे राष्ट्रगान का अपमान हुआ। इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई है और लोग अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

विपक्ष की प्रतिक्रिया: इस्तीफे की मांग

मुख्यमंत्री के कथित व्यवहार को लेकर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी दलों ने इस मामले को राज्य के सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि नीतीश कुमार को अब पद छोड़ देना चाहिए। राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने एक सुर में मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की है।

राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “नीतीश कुमार जिस तरह से राज्य का नेतृत्व कर रहे हैं, वह बेहद निराशाजनक है। अब राष्ट्रगान का अपमान कर उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उन्हें बिहार की गरिमा और मर्यादा की कोई चिंता नहीं है।”

कांग्रेस नेता मदन मोहन झा ने कहा, “यह घटना शर्मनाक है। मुख्यमंत्री को अविलंब इस पर सफाई देनी चाहिए और जनता से माफी मांगनी चाहिए।”

ललन सिंह का जवाब: ‘विपक्ष बेबुनियाद आरोप लगा रहा है’

जब केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से इस मुद्दे पर सवाल किया गया तो उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विपक्ष की बातों का कोई आधार नहीं है। ललन सिंह ने कहा, “कौन मांग रहा है इस्तीफा और किसका इस्तीफा मांगा जा रहा है? विपक्ष की बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। कुछ दिन पहले वे कह रहे थे कि बेगूसराय से निफ्ट संस्थान कर्नाटक जा रहा है, लेकिन अब कृषि मंत्री ने खुद घोषणा कर दी है कि निफ्ट बेगूसराय में ही रहेगा। विपक्ष के आरोप बेबुनियाद होते हैं और उनकी मांगों का कोई मतलब नहीं होता।”

बिहार दिवस पर भी सियासी रंग

बिहार दिवस के मौके पर भी इस मुद्दे की चर्चा तेज रही। इस मौके पर ललन सिंह ने बिहार की प्रगति की बात करते हुए कहा, “बिहार आगे बढ़ रहा है। आज बिहारी कहलाना गर्व की बात है। हम सभी को बिहार दिवस की शुभकामनाएं।”

सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं

सोशल मीडिया पर इस विवाद को लेकर आम जनता की भी मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे विपक्ष का पब्लिसिटी स्टंट बता रहे हैं, तो कुछ लोग मुख्यमंत्री से इस पर स्पष्टीकरण मांग रहे हैं।

ट्विटर पर एक यूजर ने लिखा, “नीतीश कुमार को तुरंत आकर सफाई देनी चाहिए कि इस घटना के पीछे सच्चाई क्या है। अगर उन्होंने कोई गलती की है, तो उन्हें जनता से माफी मांगनी चाहिए।”

वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा, “विपक्ष को बस बैठे-बिठाए मुद्दे चाहिए। अगर उन्हें लगता है कि नीतीश कुमार ने राष्ट्रगान का अपमान किया है, तो इसके लिए सबूत पेश करें। बिना प्रमाण के इस तरह के आरोप लगाना ठीक नहीं।”

नीतीश कुमार का अब तक कोई बयान नहीं

इस पूरे विवाद पर अब तक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि विपक्ष इस मुद्दे को बेवजह तूल दे रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में इस विवाद पर मुख्यमंत्री खुद क्या सफाई देते हैं।

क्या इस विवाद से बिहार की राजनीति पर असर पड़ेगा?

बिहार में इस समय राजनीतिक माहौल बेहद संवेदनशील है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू और भाजपा के बीच रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण बने हुए हैं। वहीं, विपक्ष भी लगातार सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। ऐसे में यह विवाद आगामी चुनावों पर कितना असर डालेगा, यह देखने वाली बात होगी।

: राजनीतिक बयानबाजियों के बीच जनता का क्या होगा?

बिहार की जनता इस समय कई समस्याओं का सामना कर रही है—बेरोजगारी, बाढ़, शिक्षा व्यवस्था की खराब स्थिति, अपराध दर में वृद्धि आदि। लेकिन इन सभी मुद्दों को छोड़कर राजनीतिक दल राष्ट्रगान विवाद को तूल दे रहे हैं। जनता चाहती है कि सरकार उनकी मूलभूत समस्याओं पर ध्यान दे, लेकिन राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीति और बयानबाजी अधिक महत्वपूर्ण होती दिख रही है।

अब यह देखना बाकी है कि आने वाले दिनों में यह विवाद कैसे मोड़ लेता है और क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस पर कोई प्रतिक्रिया देते हैं या नहीं।

News Desk

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